उत्तराखंड

केदारनाथ स्थापित 35 टन वजनी आदिगुरु शंकराचार्य की मूर्ति को बनाने में लगे नौ महीने, जानें इसकी खास बातें

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम में बनी आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा का आज पीएम नरेंद्र मोदी ने अनावरण किया। भगवान केदारनाथ के मंदिर के पास छह फीट नीचे खुदाई कर बनाए गए समाधि स्थल पर पीएम मोदी अकेले पहुंचे। शंकराचार्य की प्रतिमा को प्रणाम कर वे कुछ क्षण बैठे और आराधना की।

आदिगुरु शंकराचार्य की 12 फीट ऊंची मूर्ति कृष्णशिला पत्थर पर बनाई गई है। मैसूर के प्रसिद्ध मूर्तिकार योगीराज शिल्पी ने 120 टन के पत्थर पर शंकराचार्य की प्रतिमा को तराशा है। मूर्तिकार योगीराज ने कहा कि केदारनाथ में शंकराचार्य की मूर्ति बनाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मुझे बहुत खुशी है कि पीएम मोदी ने भारत के लोगों को प्रतिमा समर्पित की। इस मूर्ति को बनाने के लिए हमने नौ महीने तक प्रतिदिन 14-15 घंटे काम किया है।

2013 की आपदा में केदारनाथ में आदिगुरु शंकराचार्य का समाधि स्थल और उनकी मूर्ति मंदाकिनी नदी के सैलाब में तबाह हो गई थी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा निर्देश में केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों के तहत आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि विशेष डिजाइन से तैयार की गई है।

बताया गया कि प्रतिमा की चमक के लिए उसे नारियल पानी से पॉलिश किया गया है। कार्यदायी संस्था वुड स्टोन कंपनी के टीम प्रभारी मनोज सेमवाल ने बताया कि समाधि का निर्माण 36 मीटर गोलाकार में किया गया है जिसकी गहराई छह मीटर है।

अब, समाधि तक प्रवेश व निकासी के लिए अलग-अलग 3 मीटर चौड़े व 40 मीटर लंबे दो रास्तों का निर्माण किया जाना है। पांच पीढ़ियों से मूर्तिकला की विरासत को संजोए हुए मैसूर के मूर्तिकार योगीराज शिल्पी ने अपने पुत्र अरुण के साथ मिलकर मूर्ति का काम पूरा किया है।

आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा निर्माण के लिए देश भर के मूर्तिकारों की ओर से अपना मॉडल पेश किया गया था। जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से योगीराज शिल्पी को प्रतिमा तैयार करने के लिए अनुबंध किया गया था।

इस विशेष परियोजना के लिए योगीराज ने कच्चे माल के रूप में लगभग 120 टन पत्थर की खरीद की और छेनी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद इसका वजन लगभग 35 टन है। योगीराज ने साल 2020 के सितंबर माह से प्रतिमा बनाने का काम शुरू किया था। मूर्तिकला आदि शंकराचार्य को बैठने की स्थिति में प्रदर्शित करती है।

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